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Saturday, 27 October 2018

कोहली ने 4 महीने से नहीं खाया नॉनवेज, बताया क्या बदलाव आए

October 27, 2018 0
                  Indian Cricket Team के कप्तान Virat Kohli फिटनेस को लेकर बेहद सख्त रवैया अपनाते हैं. इन दिनों कोहली बेहतरीन फॉर्म में चल रहे हैं और रिकॉर्ड्स का अंबार लगा रहे हैं. इन दोनों कोहली बॉउंड्री से ज्यादा दौड़ कर रन लेने पर काफी जोर दे रहे हैं. जिसकी वजह से वह दुनिया के नंबर 1 बल्लेबाज हैं.

              अपनी फिटनेस को लेकर कोहली ने खुलासा किया है कि उन्होंने 4 महीने पहले ही नॉनवेज खाना छोड़ दिया है . Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक रन मशीन कोहली नॉन वेज छोड़ कर साग सब्जियां अधिक से अधिक खा रहे हैं.


अब कोहली अपने खाने में प्रोटीन शेक, सब्जियां और सोया का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं अंडा, मांस और डेयरी प्रॉडक्ट से उन्होंने दूरी बना ली है.

कोहली का मानना है कि नॉन वेज छोड़ने के बाद उनका खेल पहले से ज्यादा बेहतर हुआ. उनकी पाचन शक्ति मजबूत हुई. कोहली ने बताया सिर्फ 4 महीने में ही वह पहले से ज्यादा मजबूत हुए हैं.
कोहली से पहले दुनिया के कई शीर्ष खिलाड़ियों ने नॉन वेज खाना छोड़ा है. इनमें टेनिस स्टार वीनस विलियम्स और उनकी बहन सेरेना विलियम्स, फुटबॉलर लियोनल मेसी के साथ-साथ फॉर्मूला वन चैंपियन लुईस हैमिल्टन प्रमुख हैं. मेसी ने सिर्फ फीफा वर्ल्डकप के दौरान ही शाकाहारी बने थे.
कोहली ने टीम इंडिया में फिटनेस की अवधारणा को ही बदल डाला है. कैप्टन विराट ने सिर्फ खुद को, बल्कि पूरी टीम को चुस्त देखना चाहते हैं. 


विराट न सिर्फ बेहतरीन बल्लेबाज है, बल्कि एक चैंपियन एथलीट भी हैं, जो चीते जैसा शक्तिशाली है.

विराट भी कह चुके हैं, 'मुझे ऐसा महसूस हुआ था कि अगर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर बनने की होड़ में शामिल होने के लिए टॉप क्लास एथलीट भी बनना पड़ेगा.'

विराट के कोच राजकुमार शर्मा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि विराट कभी कबाब, बिरयानी और खीर पर टूट पड़ते थे. लेकिन अब सब कुछ बदल चुका है.

विराट खुद भी कह चुके हैं. मैं एक पंजाबी ब्वॉय हूं, जो आम तौर पर बटर चिकन पसंद करता था. लेकिन नियंत्रित आहार (डाइट) के शुरुआती दिन मेरे लिए आसान नहीं थे. अब तो डाइट जीवन का आधार बन चुका है. वजन उठाने से लेकर अन्य एक्सरसाइज करते हुए जिम में घंटों समय बिताता हूं.
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Monday, 1 October 2018

Antibiotics overdose is bad for Health

October 01, 2018 0

एंटीबायोटिक्स के ज्यादा प्रयोग से प्रभावित होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता ➤

          Antibiotics (एंटीबायोटिक्स) के बढ़ते उपयोग के साथ, शरीर का ‘‘अच्छे’’ विषाणु, जो कोशिकाओं में संक्रमण को रोकने और अवरुद्ध करने से रोकता है, मर सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इन दवाओं का अत्यधिक उपयोग शरीर को कुछ अच्छा करने के बजाय उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। इस अध्ययन में पाया गया कि शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण से लड़ने और अवांछित जलन और सूजन को कम करने में प्रभावी है, और एंटीबायोटिक्स ऐसी प्राकृतिक क्षमताओं को रोक सकता है।



भारतीय मूल के वैज्ञानिकों का अध्ययन 

अमेरिका के 'केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी' के शोधकर्ताओं ने कुछ प्रकार के "जीवित जीव" वायरस, उनके फैटी एसिड और सफेद रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) का विश्लेषण किया, जो मुंह के संक्रमण से लड़ने में सक्षम हैं। केस वेस्टर्न में सहायक प्राध्यापक एवं प्रमुख अनुसंधानकर्ता पुष्पा पांडियन ने कहा, “हमने यह जानने के लिए प्रयोग किया, अगर किसी फंगल संक्रमण से लड़ने के लिए हमारे पास विषाणु नहीं होगा तो क्या होगा.”

अगर हमारे पास फंगल संक्रमण से लड़ने के लिए वायरस नहीं है तो क्या होगा? "इन शोधकर्ताओं में भारतीय मूल वैज्ञानिक नटराजन भास्करन और शिवानी बुटाला शामिल थे।



एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग से कोई लाभ नहीं 


              उन्होंने कहा कि जानलेवा संक्रमण को सही करने के लिए, एंटीबायोटिक दवाओं की अभी भी जरूरत पड़ती है। पांडियन ने कहा, "हमारे शरीर में प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली है और इसे हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। एंटीबायोटिक्स के बेवजह अत्याधिक प्रयोग से कोई लाभ नहीं होता ।"यह अध्ययन 'फ्रंटियर इन माइक्रोबायोलॉजी' में प्रकाशित है।
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