Your Health Care: LIFE CARE

Health information, Health Education, Public Health, International Public Health, Global Health, Health International Health Insurance, United Health care, Health fitness, Health Diet

Braking

Showing posts with label LIFE CARE. Show all posts
Showing posts with label LIFE CARE. Show all posts

Thursday, 25 October 2018

सावधान! खड़े होकर पानी पीने से शरीर को होते हैं ये गंभीर नुकसान

October 25, 2018 0
                  शरीर को स्वस्थ और फिट रखने में पानी की अहम भूमिका होती है. मानव शरीर में पानी की मात्रा 50-60 प्रतिशत होती है. पानी शरीर के अंगों और ऊतकों की रक्षा करता है. साथ ही कोशिकाओं तक पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम भी करता है.

           हालांकि, सभी जानते हैं कि अच्छी सेहत के लिए सही मात्रा में पानी पीना कितना ज्यादा जरूरी है. लेकिन सिर्फ दिनभर में 8 गिलास पानी पीना ही अच्छी सेहत के लिए काफी नहीं होता है, बल्कि आप किस तरह और किस पोजीशन में पानी पीते हैं ये भी अच्छी सेहत के लिए बहुत मायने रखता है.




हम में से अधिकतर लोग खड़े होकर पानी पीते हैं. खड़े होकर पानी पीने की आदत आपके शरीर को बुरी तरह नुकसान पहुंचाती है, आइए जानें कैसे...

आयुर्वेद के मुताबिक, जब हम खड़े होकर पानी पीते हैं तो, इससे हमारे पेट पर अधिक प्रेशर पड़ता है, क्योंकि खड़े होकर पानी पीने पर पानी सीधा इसोफेगस के जरिए प्रेशर के साथ पेट में तेजी से पहुंचता है. इससे पेट और पेट के आसपास की जगह और डाइजेस्टिव सिस्टम को नुकसान पहुंचता है. इसके अलावा खड़े होकर पानी पीने से शरीर को इससे मिलने वाले किसी भी न्यूट्रिएंट्स का फायदा नहीं होता है.

खड़े होकर पानी पीने से पानी प्रेशर के साथ पेट में जाता है, जिससे सभी इंप्योरिटीज ब्लैडर में जमा हो जाती हैं, जो किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचता है.

Also Read-

पानी पीने का तरीका हमारी सेहत को कई तरह से प्रभावित करता है, क्योंकि पानी के प्रेशर से शरीर के पूरे बायोलॉजिकल सिस्टम पर प्रभाव पड़ता है. इससे जोड़ों के दर्द की समस्या हो जाती है.



खड़े होकर पानी पीने से फेफड़ों पर भी बुरा असर पड़ता है क्योंकि इससे हमारे फूड पाइप और विंड पाइप में ऑक्सीजन की सप्लाई रूक जाती है. अगर कोई शख्स लगातार खड़े होकर पानी पीता है तो उस व्यक्ति को फेफड़ों के साथ-साथ दिल संबंधी बीमारी होने की संभावना भी अधिक होती है.

खड़े होकर पानी पीने से प्यास कभी नहीं बुझती है. यही कारण है कि पानी पीने के कुछ मिनट बाद ही आपको फिर से प्यास लगने लगती है. इसलिए बेहतर होगा कि बैठकर आराम से पानी पिएं.

जब हम बैठकर पानी पीते हैं तो हमारी मांसपेशियां और नर्वस सिस्टम बहुत रिलेक्स रहते हैं. साथ ही खाना जल्दी डाइजेस्ट हो जाता है.

इसलिए हमेशा बैठकर ही पानी पीने की कोशिश करें. इस तरह से पानी का फ्लो धीमा रहेगा और शरीर को जरूरी न्यूट्रिएंट्स भी मिलेंगे.

Read More

Monday, 15 October 2018

सेहत के लिए फायदेमंद है नवरात्र‍ि का व्रत, ये रहे फायदे ...

October 15, 2018 0
           नवरात्रि के 9 दिन व्रत रखना सिर्फ भक्ति का विषय नहीं है, बल्कि य‍ह आपकी सेहत पर भी सीधा असर डालता है। जी हां, नवरात्र‍ि में आपकी जीवनशैली और खान-पान में लगातार 9 दिनों तक जो अंतर आता है वह आपकी सेहत को प्रभावित करता है। नवरात्रि में उपवास रखना आपकी सेहत के लिए फायदेमंद है। चलिए जानते हैं नवरात्रि उपवास के फायदे.........

 फायदे -

 नवरात्रि में व्रत रखने पर ऐसे लोग भी जल्दी उठते हैं, जिन्हें रोजाना देर तक सोने की आदत होती है। लगातार 9 दिन तक ऐसा करने पर इसका असर आपके शरीर, ऊर्जा और मानसिक सेहत पर सकारात्मक रूप से पड़ता है।

  व्रत के साथ पूजा-पाठ की जाती है, जो मानसिक शांति और तनाव कम करने में मददगार होता है। इससे आपका मानसिक स्तर सुधरता है, साथ ही आप प्रसन्न रहते हैं।

  खाने पीने में परहेज करने का असर भी आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ता है। इन दिनों आप नमक और अन्य कैलोरी फूड नहीं खाते और फल, दूध एवं जूस का सेवन ज्यादा करते हैं जिससे आपका वजन नियंत्रित होता है।



  फलाहार और तरह पदार्थों का सेवन पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है, जिसे आपको कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।

  व्रत में आप शराब, सिगरेट एवं अन्य धूम्रपान संबधी चीजों का सेवन नहीं करते, जिससे आपकी बिगड़ती सेहत पर कंट्रोल होता है, और नुकसान से भी बचते हैं।

  व्रत रखने से शरीर के अंदर से कोलेस्ट्राल की मात्रा कम होती है, जिससे आपकी बॉडी के साथ ही दिल और बाकी अंगों की फिटनेस बढ़ती है।

  इन दिनों में तापमान अधिक होता है और प्यास भी ज्यादा लगती है। ऐसे में जब आप भरपूर पानी और तरल पदार्थों का सेवन करते हैं तो डिहाइड्रेशन नहीं होता और आप ज्यादा फ्रेश रहते हैं।

  इन दिनों आप आध्यात्मिक होते हैं। आध्यात्‍म का आपकी मानसिक और आत्मिक सेहत में वृद्धि होती है और आपको अतिरिक्त ऊर्जा का एहसास होता है।
Read More

Friday, 12 October 2018

कुछ अच्छी आदतें जो आपके स्वास्थ्य को बदल सकती हैं

October 12, 2018 0

Some Good Habits which can changes your Health-


घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें।

   बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं।

   ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें।

*

 अपने विश्राम करने या सोने के कमरे को साफ-सुथरा, हवादार और खुला-खुला रखें। चादरें, तकियों के गिलाफ तथा पर्दों को बदलती रहें तथा मैट्रेस या गद्दों को भी समय-समय पर धूप दिखाकर झटकारें।

  कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

  45 की उम्र के बाद अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें और यदि डॉक्टर आपको कोई औषधि देता है तो उसे नियमित लें। प्रकृति के करीब रहने का समय जरूर निकालें। बच्चों के साथ खेलें, अपने पालतू जानवर के साथ दौड़ें और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन का भी समय निकालें।

  मेडिटेशन, योगा या ध्यान का प्रयोग एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव से दूर रहने के लिए करें।




  खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल-अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में 'वैरायटी ऑफ फूड' शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।

   खाना पकाने के लिए अनसैचुरेटेड वेजिटेबल ऑइल (जैसे सोयाबीन, सनफ्लॉवर, मक्का या ऑलिव ऑइल) के प्रयोग को प्राथमिकता दें। खाने में शकर तथा नमक दोनों की मात्रा का प्रयोग कम से कम करें। जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक तथा आर्टिफिशियल शकर से बने ज्यूस आदि का उपयोग न करें। कोशिश करें कि रात का खाना आठ बजे तक हो और यह भोजन हल्का-फुल्का हो।

  कोई भी एक व्यायाम रोज जरूर करें। इसके लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा दें और व्यायाम के तरीके बदलते रहें, जैसे कभी एयरोबिक्स करें तो कभी सिर्फ तेज चलें। अगर किसी भी चीज के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे तो दफ्तर या घर की सीढ़ियां चढ़ने और तेज चलने का लक्ष्य रखें। कोशिश करें कि दफ्तर में भी आपको बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठा रहना पड़े।


Read More

Friday, 5 October 2018

5 बुरी आदतें जो आपको करती हैं बीमार,स्वस्थ दिल के लिए खाने की इन आदतों को बदलें...

October 05, 2018 0
Top 5 Foods Habits for a Healthy Heart:-

                इस भागदौड़ भरी जिंदगी में Exercise और अच्छा खानपान दोनों ही जरूरी हैं. इससे आपका दिल तंदुरुस्त (Healthy Heart) रहता है. पिछले तीन दशकों में आम भारतीयों में दिल की बीमारी (heart disease) coronary artery disease (CAD) के मामलों में 300 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है. इससे पीड़ित 2 से 6 फीसदी लोग गांव-कस्बों में और 4 से 12 फीसदी लोग शहरों में रहते हैं. 

             कई चीजों के अलावा, इसके लिए जीवनशैली से जुड़े कारक जैसे कि शराब का अत्यधिक मात्रा में सेवन (Alcohol and Heart Health) भी जिम्मेदार है. अधिक मात्रा में शराब के सेवन से रक्त धमनियों में एक प्रकार की बाधा (cholesterol plaque in the walls of arteries) उत्पन्न हो सकती है, जिसे Atherosclerosis के नाम से जाना जाता है. इसके चलते एक अथवा कई रक्त धमनियां थोड़ी या फिर पूरी तरह से ब्लॉक  हो जाती हैं, जिससे रक्त के प्रवाह पर असर पड़ता है. अनियंत्रित CAD की वजह से एक समय के बाद हार्ट अटैक की आशंका भी बढ़ जाती हैं और आप किस तरह इस संभावना को कम कर सकते हैं-



www.lessons4u.ooo


                दिल की बीमारियों (heart disease) से बचने के लिए आपको अपने आहार को अच्छा बनाने की जरूरत है. और सेहतमंद दिल के लिए कैसा आहार होना चाहिए ???

             इसके लिए न्यूट्रिशनिस्ट और बेलैंस को न्यूट्री एक्टीवेनिया की प्रमुख अवनि कौल ने दिल को स्वस्थ रखने के लिए ये पांच सुझाव दिए हैं (Top 5 foods for a healthy heart) :

1. भोजन की मात्रा पर ध्यान दें (Servings from Each Food Group):-

                 मोटापे से रक्तचाप बढ़ता है और फिर दिल की अनेक बीमारियां होने का सदैव अंदेशा रहता है. इसलिए हमेशा अपने शरीर की जरूरत भर ही खाना खाएं. मैदा इत्यादि का सेवन कम करें. सब्जियां और फलों की मात्रा बढ़ाएं. घर के बाहर खाने में अक्सर मात्रा का अंदाजा नहीं लग पाता है.

2. घर पर खाने को हमेशा प्राथमिकता दें (Homemade food):-

                अगर आप भी दिल की सेहत से जुड़े कुछ फैसले करना चाहते हैं तो बाहर की बजाए घर का खाना खाने की आदत ड़ालें. घर पर भोजन करना अधिक पौष्टिक होता हैं, क्योंकि आप स्वयं सब्जी, मसाले, चिकनाई एवं पकाने की विधि का चयन करते हैं. आप खाने को ज्यादा स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें विभिन्न प्रकार के मसाले डाल सकते हैं और नमक एवं चीनी जैसे हानिकारक तत्वों की मात्रा कम कर सकते हैं.

                  घर के खाने में परिवार के सभी सदस्यों से सलाह एवं सहायता लेकर एक पारिवारिक गतिविधि का रूप दे सकते हैं. यह खाना सस्ता भी पड़ता है. सब्जियों को अधिक तलकर या भून कर ना बनाएं. इन विधियों में तल की खपत अधिक हाती है जिससे मोटापा बढ़ता है. उबालकर या कम तेल में खाना बनाने की चेष्टा करें और जहां तक हो सके, हमेशा ताजा खाना खाएं.

www.lessons4u.ooo

3. अधिक फाइबर वाला खाना खाएं (Fiber for Heart):-

                   साबूत दालें-अनाज, सब्जियां जैसे गाजर, टमाटर आदि में न घुलने वाला फाइबर होता है. दलिया, सेम, लोभिया सूखे मेवे और फल जैसे सेब, नींबू, नाशपाती, अनानास आदि में घुलनशील फाइबर होते हैं.

                   फाइबर युक्त भोजन अधिक समय तक पेट में रहता है, जिसके कारण पेट भरा हुआ महसूस होता है और खाना भी कम खाया जाता है. इसी कारण वजन भी कम होता है. फाइबर युक्त भोजन पाचन के समय शरीर से बसा निकाल देता है, जिसके कारण कॉलेस्ट्रॉल कम होता है व हृदय अधिक तंदुरुस्त होता है. फाइबर युक्त भोजन से अधिक ऊर्जा मिलती है जिसके कारण व्यायाम में थकान कम होती है. फाइबर युक्त भोजन से शरीर व हृदय दोनों सशक्त होते हैं.

4. अच्छी सेहत के लिए कम खाना चाहिए नमक और बासी खाना (Is Salt Bad for You?) :-

                  भोजन में अधिक नमक की मात्रा होने से रक्तचाप बढ़ जाता है. इस कारण हृदय में कई बीमारियां होने की संभावना भी बढ़ जाती है. तो जहां तक हो सके, ताजा खाना खाने की चेष्टा करें, क्योंकि पहले से निर्मित किये भोजन में कई हानिकारक पदार्थ होते हैं. ये भोजन का स्वाद ठीक बनाए रखने के लिए डाले जाते हैं. खाने को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए मसाले, हरा धनिया, पुदीना आदि डालिए. इस तरह नमक की मात्रा भी कम हो जाएगी.

5. नुकसानदेह चिकनाई यानी वसा की जगह फायदेमंद चिकनाई खाएं ( Which Fats Really Are Good for Your Heart?):-

                   यह जानना भी तार्किक है कि तेल, दूध एवं दूध से बनी वस्तुएं और लाल मांस में नुकसानदेह चिकनाई होती है जो आपका बुरा कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाकर आपके हृदय को अस्वस्थ करती है, लेकिन मछली, अंडा, झिल्ली उतारा हुआ मुर्गा, दालें, टोफू, किनुआ इत्यादि से पोष्टिक प्रोटीन एवं फायदेमंद चिकनाई दोनों मिलती है. बाजार में मिलने वाले अधिकतर खाने की वस्तुओं में अच्छा पौष्टिक तेल नहीं होता. इस कारण इनका उपभोग कम से कम करना चाहिए. चीनी एवं मैदे का उपयोग कम से कम करना चाहिए और भोजन में पौष्टिक तत्व जैसे सूखे मेवे, हरी सब्जियां इत्यादि का उपयोग बढ़ा देना चाहिए.

Read More

Thursday, 4 October 2018

डेंगू के बारे में अहम बातें, जिन्हें शायद ही जानते होंगे आप

October 04, 2018 0

डेंगू एडीज़ मच्छर के काटने से फैलता है जिसमें तेज़ बुखार के साथ शरीर पर लाल रंग के चकते, सिर और बदन दर्द होता है।
                      हर साल सैकड़ों लोगों के लिए डेंगू जानलेवा बन जाता है। इस प्रकार यह आवश्यक है कि लोगों को इसके बारे में अवगत कराया जाए। डेंगू बुखार एडीज़ इजिप्टी मच्छर के काटने के माध्यम से फैलता है। ये मच्छर स्थिर पानी में उगते हैं, और आमतौर पर मानसून के दौरान जल-जमाव की स्थिति में उनका जन्म होता है। डेंगू में व्यक्ति को सबसे पहले तेज़ बुखार होता है जिसके बाद शरीर पर लाल रंग के चकते पड़ना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, भूख और उल्टी की कमी के लक्षण शामिल हैं। लेकिन रक्त परीक्षण के बाद ही डेंगू की पुष्टि की जा सकती है। डेंगू से संबंधित कुछ चीजें वे हैं जिन्हें आप शायद ही जानते हैं, चलिए कुछ 5 चीजें इस तरह जानते हैं -


डेंगू मच्छर आपके सफेद रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है-

               एक डेंगू मच्छर आपके लिए जानलेवा हो सकता है क्योंकि डेंगू मच्छर सीधे आपके सफेद रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है। इस प्रकार आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर पड़ने लगती है। एक डेंगू मच्छर एक समय में लगभग 100 अंडे देता है और यह लगभग दो सप्ताह तक रहता है।


रात में लाइट के उजाले में काट सकते हैं मच्छर-

               ऐसा माना जाता है कि डेंगू मच्छर केवल दिन की रोशनी में काटता है, लेकिन यहां बिंदु यह है कि रात में लाइट के उजाले में भी मच्छर के काटने की संभावनाएं बनी रहती हैं। डेंगू का मच्छर सुबह के वक़्त और शाम को सूर्यास्त के समय ज़्यादा काटता है। ये मच्छर 15-16 डिग्री से कम तापमान में पैदा नहीं हो पाते हैं। डेंगू के सबसे ज़्यादा मामले जुलाई से अक्टूबर के बीच दर्ज किए जाते हैं।


घरों में पानी की टंकी में पैदा होते हैं डेंगू मच्छर-

              दिल्ली स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 41% डेंगू मच्छर प्लास्टिक के ड्रम और टंकियों में पैदा होते हैं। इसके साथ ही कूलर में 12% और निर्माण स्थलों पर इस्तेमाल होने वाले लोहे के कंटेनरों में 17% डेंगू मच्छर पैदा होते हैं।

डेंगू में प्लेटलेट्स की कमी नहीं होती मौत की वजह-

               आम तौर पर लोग मानते हैं कि डेंगू के दौरान प्लेटलेट की कमी के कारण रोगी मर जाते हैं। लेकिन शायद ही लोग जानते हैं कि डेंगू में मृत्यु का कारण कैशिलरी लीकेज है। अगर एक मरीज को केशिका लीकेज होता है ऐसी स्थिति में, उसे तरल भोजन देना चाहिए। यह तब तक जारी रखना चाहिए जब तक उच्च और निम्न रक्तचाप के बीच का अंतर 40 से अधिक न हो।

डेंगू संक्रामक बीमारी नहीं है-

            डेंगू को आमतौर पर संक्रामक बीमारी माना जाता है। लेकिन हकीकत में, डेंगू संक्रामक बीमारी नहीं है क्योंकि यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता नहीं है। चार प्रकार के डेंगू बीमारी हैं। मरीज को एक बारी में एक ही प्रकार का डेंगू होता है और दूसरी बार डेंगू दूसरी तरह का होता है।डेंगू बीमारी को लेकर लोगों का मानना होता है कि इस दौरान प्लेटलेट्स काउंट बहुत मायने रखते हैं और सिर्फ़ इन्हें बढ़ाने पर ज़ोर देना चाहिए। आपको बता दें कि जिन मरीजों के प्लेटलेट काउंट 10,000 से कम पहुंच जाते हैं सिर्फ़ उन्हीं मरीज़ों के लिए डेंगू जानलेवा  स्थिति में पहुंचने की संभावना होती है।
Read More

Wednesday, 3 October 2018

Ayurveda: easy steps to control Diabetes in Hindi

October 03, 2018 0

आयुर्वेद: मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए 3 आसान कदम, सीखें कि क्या करना है

                डायबिटीज जिसे सामान्यतः मधुमेह कहा जाता है। एक ऐसी बीमारी है जिसमें खून में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। उच्च रक्त शर्करा के लक्षणों में अक्सर पेशाब आना होता है, प्यास की बढ़ोतरी होती है, और भूख में वृद्धि होती है। अमेरिका में, यह मृत्यु का आठवां और अंधापन का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है। 

               आजकल पहले से कहीं ज्यादा संख्या में युवा लोग और यहां तक ​​कि बच्चे मधुमेह से पीड़ित हैं। बेशक, इसके लिए मुख्य कारणों में से एक पिछले 4-5 दशकों में चीनी, आटा और अजीब खाद्य उत्पादों में किए गए प्रयोग हैं। हम आपको मधुमेह के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में बता रहे हैं।



ये 3 पेय फायदेमंद हैं -

आंवले के स्वरस या आंवले के जूस को 40 मिली लेकर उसमें 1 ग्राम हल्दी पाउडर और 6 ग्राम शहद डालकर उसे सुबह-शाम इस्तेमाल करें। दूसरा उपाय है कि 20 ग्राम आंवला पाउडर लेकर उसमें 250 मिली पानी मिलाएं और उसको मध्यम आंच पर पकाएं और जब वो 1/4 मतलब लगभग 60 मिली रह जाए तो उसे उतार कर, छान कर, ठंडा करके उसमें 250 मिलीग्राम त्रिवंग भस्म, 500 मिलीग्राम छोटी इलायची का चूर्ण, 1 ग्राम हल्दी पाउडर, 6 ग्राम शहद को मिलाएं। इसे सुबह-शाम इस्तेमाल करें।

  दूसरा उपाय लगभग 150 ग्राम की अमरूद की पत्तियों को लेना है, उन्हें पीस कर पानी में भिगो लें और सुबह उन पत्तों को छान के उस पानी को घूंट ले लेकर पिएं। यह मधुमेह में राहत प्रदान करता है।

  यदि आपका शुगर लेवल बहुत अधिक है और आपको इसे सामान्य बनाना है, तो 50 ग्राम बांस की पत्तियां लें और इसे 600 मिलीलीटर पानी में उबालें जब तक कि यह लगभग 75 से 80 मिलीलीटर न हो। अब उसे ठंडा करके, छान कर पीएं। यह जल्द ही इससे शुगर का लेवल जल्दी ही सामान्य अवस्था में आ जाता है। आयुर्वेद में पंचकर्म विधा के द्वारा भी हम डायबिटीज़ का इलाज कर सकते हैं।

डायबिटीज़ के रोगी क्या करें, क्या न करें -

            अब बात करेंगे कि डायबिटीज़ के रोगियों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं। डायबिटीज़ के लिए दैनिक दिनचर्या बनाना बहुत महत्वपूर्ण है।

  सुबह जल्दी उठना चाहिए।

  व्यायाम के लिए समय निकलना चाहिए । हर रोज, प्राणायाम, योग, व्यायाम किया जाना चाहिए।

  आलसी जीवन शैली के बजाय, सक्रिय जीवनशैली अपनाना जाना चाहिए।

  साइक्लिंग, जिमिंग,स्विमिंग जो भी पसंद है उसे 30-40 मिनट तक ज़रूर करने की आदत डालें। 



क्या खाना खाएं -

जानें कि मधुमेह में किस प्रकार का आहार फायदेमंद है?

  मधुमेह को थोड़ा और पचाने वाला भोजन खाना चाहिए।

  मधुमेह में, हम सभी मौसमी और रसदार फल खा सकते हैं। यदि आप सूखे फल के बारे में बात करते हैं तो आप अखरोट, बादाम, चिया के बीज, मूंगफली और अंजीर भी ले सकते हैं।

  अपनी डाइट में गुनगुना पानी, छाछ, जौ का दलिया और मल्टीग्रेन आटा (मिलाजुला अनाज) शामिल करें।

इन चीजों को मत खाओ -

  मांसाहारी, शराब और सिगरेट का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

  डिब्बाबंद भोजन, पुराना भोजन, फास्ट फूड, जंक फूड, अधिक तेल मसालेदार खाना नहीं खाया जाना चाहिए।
         आप इन आयुर्वेदिक उपचारों का पालन करके स्वस्थ रह सकते हैं।
Read More