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Friday, 12 October 2018

नींद लेने के शौकीन हैं तो सावधान हो जाइए, ये रहा कारण...

October 12, 2018 0
              अधिक सोने से आपके मस्तिष्क के काम करने के तरीके को नुकसान पहुंच सकता है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जो कम सोता है या रात में सात से आठ घंटे से ज्यादा की नींद लेता है उसकी समझने-जानने की क्षमता कम हो जाती है।

             कनाडा के वेस्टर्न विश्वविद्यालय  के शोधकर्ताओं का कहना है कि पिछले साल जून में शुरू किए गए नींद संबंधी सबसे बड़े शोध में विश्व भर के 40,000 लोग शामिल हुए। ऑनलाइन शुरू की गई इस वैज्ञानिक जांच में एक प्रश्नावली और ज्ञानात्मक प्रदर्शन (काग्नेटिव परफार्मेन्स) वाली गतिविधियों की श्रृंखला शामिल की गई।

            वेस्टर्न विश्वविद्यालय के एड्रियन ओवन ने कहा, “हम वास्तव में विश्व भर के लोगों की सोने की आदतों के बारे में जानना चाहते थे। निश्चित तौर पर प्रयोगशालाओं में छोटे पैमाने पर नींद पर शोध हुए हैं लेकिन हम यह जानना चाहते थे कि वास्तविक जगत में लोगों की नीद संबंधी आदतें कैसी हैं।” लगभग आधे प्रतिभागियों ने प्रति रात 6.3 घंटे से कम नींद लेने की बात कही जो अध्ययन में अनुशंसित नींद की मात्रा से एक घंटे कम थी।

इसमें एक चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि चार घंटे या उससे कम नींद लेने वालों का प्रदर्शन ऐसा था जैसे वह अपनी उम्र से नौ साल छोटे हों।

अन्य आश्चर्यचकित करने वाली खोज यह थी कि नींद सभी वयस्कों को समान रूप से प्रभावित करती है। नींद की अवधि और अत्याधिक कार्यात्मक संज्ञानात्मक व्यवहार के बीच संबंध सभी उम्र के लोगों में समान दिखा।

शोधकर्ताओं ने पाया कि आपके मस्तिष्क को सही से काम करने के लिए सात से आठ घंटे की नींद चाहिए होती है और डॉक्टर भी इतनी ही नींद लेने की सलाह देते हैं।
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Thursday, 11 October 2018

दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति की उम्र होगी 65 साल

October 11, 2018 0

'यंग इंडिया' 2050 तक बन जाएगा 'ओल्ड इंडिया', पांच में एक आदमी की उम्र होगी 65 साल-

                मौजूदा आबादी के चलन को देखते हुए, यह उम्मीद की जाती है कि 2050 तक दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति की उम्र 65 साल से अधिक होगी और करीब 50 करोड़ आबादी 80 साल से अधिक उम्र वालों की होगी.



दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति की उम्र होगी 65 साल-


                     भारत में जीवन प्रत्याशा दर में वृद्धि ने नीतिकारों के माथे पर लकीर खींच दी है. 1947 में जो जीवन प्रत्याशा दर लगभग 32 वर्ष हुआ करती थी, वह आज बढ़कर 68 वर्ष हो गई है. ऐसा अनुमान है कि 2050 तक दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति की उम्र 65 साल से अधिक होगी और करीब 50 करोड़ आबादी 80 साल से अधिक उम्र वालों की होगी. हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, "अधिक से अधिक लोग काम के लिए शहरों में जा रहे हैं, जिससे पारंपरिक परिवार संरचनाएं बाधित हो रही हैं. ऐसी स्थिति में, परिवार के बुजुर्ग ही हैं जो पीछे छोड़ दिये जाते हैं और ऐसी स्थिति में उनकी देखभाल कठिन हो रही है. वृद्ध व्यक्तियों को अक्सर युवाओं से कम सक्षम और कम काबिल माना जाता है."

                 उन्होंने कहा, "जागरूकता पैदा करने की जरूरत है कि बुजुर्गों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उन्हें स्वस्थ तरीके से जीने में मदद कर सकता है. वृद्धावस्था को जीवन के एक और चरण के रूप में देखने की आवश्यकता है. ऐसा करने और बुजुर्गों से सम्मान के साथ व्यवहार करने से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं."
                  मौजूदा आबादी के चलन को देखते हुए, यह उम्मीद की जाती है कि 2050 तक दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति की उम्र 65 साल से अधिक होगी और करीब 50 करोड़ आबादी 80 साल से अधिक उम्र वालों की होगी.

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1. केले के छिलकों में है गुणों का ऐसा खजाना कि जानकर चौंक जाएंगे आप 
2. 5 बुरी आदतें जो आपको करती हैं बीमार,स्वस्थ दिल के लिए खाने की इन आदतों को बदलें... 




               डॉ. अग्रवाल ने कहा, "बुजुर्गों के सामने पेश आने वाली चुनौतियों पर ध्यान देने की जरूरत है और उन्हें सक्रिय भूमिका निभाने के लिए दुनिया को और समुदायों को अधिक समावेशी बनाने की आवश्यकता है. व्यक्तिगत स्तर पर, लोगों को स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए, बीमारियों और जटिलताओं से बचने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव करने चाहिए."
       
     डॉ. अग्रवाल ने उम्र बढ़ने के साथ स्वस्थ रहने के लिए सुझाव देते हुए कहा, "ऐसा मत सोचिए कि आप बूढ़े हो. अपनी 80 या 100 साल की आयु में से अनुभव के 20 से 40 या अधिक वर्ष कम करिए, जो बचे वही आपकी वास्तविक आयु है. धूम्रपान छोडें, व्यायाम को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. फिसलकर गिरने से बचने के लिए अपने घर में छोटे-मोटे बदलाव करें, विभिन्न आयु से संबंधित बीमारियों की जांच करने के लिए मेडिकल स्क्रीनिंग करवाएं."

                उन्होंने कहा, "हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि के साथ एक संतुलित स्वस्थ आहार लेने से उम्र बढ़ने पर अधिक समस्याएं नहीं होती हैं. कैल्शियम और विटामिन डी का सप्लीमेंट लेने से महिलाओं को खास मदद मिल सकती है. उम्र बढ़ने के साथ होने वाले डिमेंशिया और संज्ञानात्मक हानि का सामना करने के लिए बुढ़ापे में भी अपने दिमाग को सक्रिय रखना चाहिए. कई बुजुर्ग लोगों को नींद ठीक से लेने में समस्याएं आती हैं. अनिद्रा और दिन में ज्यादा सोने की शिकायतें आम हैं. ऐसे मुद्दों के बारे में अपने हेल्थकेयर प्रदाता से बात करें."
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Tuesday, 9 October 2018

रिसर्च में दावा- नोटों में मिले पेट की बीमारियां फैलाने वाले बैक्टीरिया

October 09, 2018 0

नोट पर मिले 78 तरह के बैक्टीरिया दे सकते हैं टीबी, अल्सर, और पेट की बीमारी : रिपोर्ट


रिसर्च में दावा- नोटों में मिले पेट की बीमारियां फैलाने वाले बैक्टीरिया

                  आपकी जेब में रखा नोट आपको बीमार बना सकता है। यह टीबी, अल्सर, पेट की बीमारी का करण बन सकता है। यह बात कितनी सही है? यह सवाल छोटे व्यापारियों के देशव्यापी संगठन 'कैट' ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से पूछा है। 'कैट' एक रिसर्च रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस बात की जांच करने की मांग की है। कैट का कहना है कि ऐसे दावों की जांच कराकर सही तस्वीर सामने लाई जानी चाहिए। यदि दावे सही हैं तो बीमारियों से बचाव के उपाय किए जाने चाहिए।



रिपोर्ट में क्या है ?


                   रिपोर्ट्स के मुताबिक करेंसी नोट हजारों लोगों के हाथों से होकर गुजरते हैं। इनमें गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोग भी शामिल हैं। इस तरह करेंसी हजारों प्रकार के कीटाणुओं के संपर्क में आती है। इससे बीमारियां फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है। कैट ने इस पत्र की एक कॉपी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मंत्री जेपी नड्डा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को भी भेजी है। कैट का मानना है कि सरकार के अलावा मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को भी आगे आना चाहिए। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा, यदि रिसर्च रिपोर्ट्स सही हैं तो करेंसी नोट न सिर्फ व्यापारियों बल्कि आम उपभोक्ता के लिए भी खतरनाक हैं।'


नोटों पर 78 प्रकार के बैक्टीरिया मिले हैं :सीएसआईआर

                काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के अंतर्गत काम करने वाले संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटिग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के रिसर्च में चौकाने वाली बात सामने आई है। करेंसी नोटों में बीमारियां फैलाने वाले 78 प्रकार के बैक्टीरिया पाए गए हैं। ज्यादातर नोटों में पेट खराब होने, टीबी और अल्सर जैसी अन्य बीमारियां फैलाने वाले बैक्टीरिया मिले हैं। जापान और यूरोप के कई देशों में नोटों को मशीनों के जरिए बैक्टीरिया से मुक्त करने के लिए व्यवस्था की गई है।

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नोटों पर दिमागी बुखार के कीटाणु : आईजेसीएमएएस


                इंटरनेशनल जर्नल ऑफ करंट माइक्रोबायोलॉजी एंड एप्लाइड साइंसेज (आईजेसीएमएएस) ने तमिलनाडु के तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज में 2016 में करंसी नोटों पर रिसर्च की थी। जिन 120 नोटों पर रिसर्च की गई उनमें 86.4% नोट बैक्टीरिया से संक्रमित थे। ये नोट डॉक्टर्स, बैंक, बाजार, मीट कारोबारी, विद्यार्थी और गृहिणियों से लिए गए थे। डॉक्टरों से लिए गए नोटों में मूत्र संबंधी, सांस लेने में परेशानी, सेप्टिसीमिया, स्किन इन्फेक्शन, दिमागी बुखार आदि के कीटाणु पाए गए हैं।

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Sunday, 7 October 2018

केले के छिलकों में है गुणों का ऐसा खजाना कि जानकर चौंक जाएंगे आप

October 07, 2018 0
एक नजर केले के छिलके के बड़े फायदों पर :-

                हम सब ने सुना है कि फलों को उनके झिलकों के साथ खाना चाहिए, लेकिन हम में से कितने लोग इस बात को मानते हैं यह एक बड़ा सवाल है. यकीनन आप भी ऐसा ही करते होंगे. हममें से बहुत से लोग केला खाकर उसके छिलके (Banana Peels) को कुड़े में फेंक देते हैं. अगर आप ऐसा करते हैं तो जरा ठहर जाएं. क्योंकि जिस चीज को आप फेंक रहे हैं उसमें गुणों का ऐसा खजाना है जिसके बारे में जानकर आप चौंक सकते हैं.


                केले के छिलके (Health benefits of Banana Peels) की मदद से आप शरीर को भारी मात्रा में न्यूट्रीयंट्स देने के साथ वज़न भी कम कर सकते हैं. जी हां, केला एक ऐसा फल है, जिसे मानव द्वारा कई सालों से जोता जा रहा है. इसमें ज़रूरतमंद विटामिन जैसे बी-6 और बी-12 के अलावा मिनरल्स, पोटैशियम और मैग्नीशियम होता है. यह फाइबर का एक अच्छा स्रोत होता है, जो आपकी पाचन क्रिया को ठीक करने में काफी मदद करता है.
Benefits of Banana Peels: केले के छिलके में विटामिन-ए की मात्रा पाई जाती है.
Health benefits of Banana Peels:




5 बुरी आदतें जो आपको करती हैं बीमार,स्वस्थ दिल के लिए खाने की इन आदतों को बदलें... 


केले के छिलके में विटामिन-ए  की मात्रा पाई जाती है, जो इम्यूनिटी को मज़बूत कर इंफेक्शन से लड़ने में मदद करता है.

केले के छिलके में लुटीन  होता है, जो आंखों में मोतियाबिंद  होने से रोकता है.

केले के छिलके में एंटी-ऑक्सीडेंटस  होने के साथ विटामिन-बी, ख़ासतौर से विटामिन-बी-6 की मात्रा होती है.

इसमें घुलने वाले और न घुलने वाले फाइबर होते हैं, जो पाचन क्रिया के कार्य को धीरे कर, शरीर से कोलेस्टेरॉल को कम करते हैं.

केले का छिलका खाने में से आप शरीर के लिए जरूरी पोटैशियम  और मैग्नीशियम  पा सकते हैं, जो बल्ड प्रेशर को बनाए रखने में मदद करती है.

कई अध्ययनों का तो यह भी मानना है कि छिलके में सेरोटोनिन नाम का पदार्थ होता है, जो डिप्रेशन पर काबू रख आपको खुश रखता है. इसके अलावा इसमें डोपामाइन होता है, जो दिल की धड़कन पर नियंत्रण रख गुर्दो में खुन का प्रवाह बनाए रखता है.

इस बात पर ध्यान देना भी जरूरी है कि केले का छिलका आपको कैसा लेना है. यह पका हुआ होना चाहिए या कच्चे केले का छिलका इस्तेमाल करना चाहिए.

जापानी साइंटिफिक रिसर्च के मुताबिक पीले छिलके में एंटी-कैंसर गुण होते हैं, जो व्हाइट बल्ड सेल्स को उत्पन्न करने में मदद करते हैं. अगर आप अपने आहार में केले का हरा छिलका शामिल करते हैं, तो इसे मुलायम करने के लिए 10 मिनट उबालें. इसके बाद इस्तेमाल करें.

एक और अध्ययन के अनुसार बताया गया है कि हरे छिलके में ट्रिपटोफन  नामक पदार्थ होता है, जो एक तरह का अमीनो एसिड है. यह रात को अच्छी नींद लेने के लिए लाभकारी है.



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Tuesday, 2 October 2018

Intelligent People often Sleep late, do the use of wrong language - Research

October 02, 2018 0

बुद्धिमान लोग अक्‍सर देर से सोते हैं, अभद्र भाषा का करते हैं इस्‍तेमाल- रिसर्च 

              इनके बारे में यह भी कहा गया कि स्‍मार्ट लोगों  में बाकियों की तुलना में चीजों और परिस्थितियों के मुताबिक अनुकूलन क्षमता अधिक होती है.  

              क्‍या आप देर से सोने जाते हैं? क्‍या आप बाकियों की तुलना में अभद्र शब्‍दों का अधिक इस्‍तेमाल करते हैं? हो सकता है कि इसकी वजह से घर-बाहर आपकी आलोचना होती हो लेकिन एक नए शोध  में यह दावा किया गया है कि बात कुछ और है. दरअसल एक रिसर्च में यह दावा किया गया है कि इस तरह के लोग आमतौर पर ईमानदार और बुद्धिमान  होते हैं.

             इस शोध में यह भी कहा गया कि ये लोग थोड़ा बेतरतीब ढंग से जीते हैं. बहुत सुव्‍यस्थित नहीं होते. अक्‍सर अपनी बातों, भावों, विचारों को पुख्‍ता तरीके से रखने के लिए ऐसे शब्‍दों का इस्‍तेमाल करने से भी गुरेज नहीं करते जो शिष्‍टता के दायरे में नहीं आते. इस शोध में यह भी दलील दी गई कि इस तरह के शब्‍दों का प्रयोग उनके भाषा के प्रवाह और शब्‍दावली पर पकड़ को भी दर्शाता है.




देर से सोते हैं बुद्धिमान लोग-

                     इस स्‍टडी के मुताबिक जिन लोगों का बौद्धिक स्‍तर (आईक्‍यू) अधिक होता है, वे रात में अधिक सक्रिय होते हैं. लिहाजा अधिक रात तक जगते हैं. इस स्‍टडी के मुताबिक जिन लोगों का आईक्‍यू 75 से कम होता है, वे रात में 11:41 बजे तक जगते हैं और वहीं जिन लोगों का आईक्‍यू 123 से अधिक है, वे आमतौर पर मध्‍यरात्रि के बाद यानी 12:30 बजे तक जागते हैं. इस रिसर्च में इस तरह के लोगों को स्‍मार्ट कहा गया है. इनके बारे में यह भी कहा गया कि स्‍मार्ट लोगों में बाकियों की तुलना में चीजों और परिस्थितियों के मुताबिक अनुकूलन क्षमता अधिक होती है. ऐसे लोग समस्‍याओं का समाधान खोजने में दिलचस्‍पी रखते हैं. इस संबंध में महान वैज्ञानिक अल्‍बर्ट आइंसटीन ने भी कहा है कि बुद्धिमान लोगों की निशानी उनका ज्ञान नहीं बल्कि कल्‍पनाशीलता होती है.



सकारात्‍मक विजन-

                     रिसर्च के मुताबिक ऐसे लोगों की खास निशानी यह होती है कि इनका चीजों को देखने का नजरिया बहुत सकारात्‍मक होता है. वे हर चीज में सकारात्‍मकता खोजते हुए उसमें से सर्वश्रेष्‍ठ निकालने की कोशिश करते हैं. ऐसे लोग अपनी गलतियों से सीखते हैं.

नैतिकता का तकाजा-

                    इस रिसर्च में यह भी दावा किया गया है कि ऐसे लोग अधिक नैतिक होते हैं. इस संबंध में मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने कहा था कि शिक्षा के माध्‍यम से व्‍यक्ति में आलोचनात्‍मक और सघन नजरिया विकसित होना चाहिए. नैतिकता के साथ बौद्धिकता का मनुष्‍य में विकास शिक्षा का मकसद होना चाहिए
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