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Friday, 12 October 2018

कुछ अच्छी आदतें जो आपके स्वास्थ्य को बदल सकती हैं

October 12, 2018 0

Some Good Habits which can changes your Health-


➤ घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें।

➤   बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं।

➤   ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें।

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➤ अपने विश्राम करने या सोने के कमरे को साफ-सुथरा, हवादार और खुला-खुला रखें। चादरें, तकियों के गिलाफ तथा पर्दों को बदलती रहें तथा मैट्रेस या गद्दों को भी समय-समय पर धूप दिखाकर झटकारें।

➤  कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

➤  45 की उम्र के बाद अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें और यदि डॉक्टर आपको कोई औषधि देता है तो उसे नियमित लें। प्रकृति के करीब रहने का समय जरूर निकालें। बच्चों के साथ खेलें, अपने पालतू जानवर के साथ दौड़ें और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन का भी समय निकालें।

➤  मेडिटेशन, योगा या ध्यान का प्रयोग एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव से दूर रहने के लिए करें।




➤  खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल-अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में 'वैरायटी ऑफ फूड' शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।

➤   खाना पकाने के लिए अनसैचुरेटेड वेजिटेबल ऑइल (जैसे सोयाबीन, सनफ्लॉवर, मक्का या ऑलिव ऑइल) के प्रयोग को प्राथमिकता दें। खाने में शकर तथा नमक दोनों की मात्रा का प्रयोग कम से कम करें। जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक तथा आर्टिफिशियल शकर से बने ज्यूस आदि का उपयोग न करें। कोशिश करें कि रात का खाना आठ बजे तक हो और यह भोजन हल्का-फुल्का हो।

➤  कोई भी एक व्यायाम रोज जरूर करें। इसके लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा दें और व्यायाम के तरीके बदलते रहें, जैसे कभी एयरोबिक्स करें तो कभी सिर्फ तेज चलें। अगर किसी भी चीज के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे तो दफ्तर या घर की सीढ़ियां चढ़ने और तेज चलने का लक्ष्य रखें। कोशिश करें कि दफ्तर में भी आपको बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठा रहना पड़े।


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Thursday, 11 October 2018

दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति की उम्र होगी 65 साल

October 11, 2018 0

'यंग इंडिया' 2050 तक बन जाएगा 'ओल्ड इंडिया', पांच में एक आदमी की उम्र होगी 65 साल-

                मौजूदा आबादी के चलन को देखते हुए, यह उम्मीद की जाती है कि 2050 तक दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति की उम्र 65 साल से अधिक होगी और करीब 50 करोड़ आबादी 80 साल से अधिक उम्र वालों की होगी.



दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति की उम्र होगी 65 साल-


                     भारत में जीवन प्रत्याशा दर में वृद्धि ने नीतिकारों के माथे पर लकीर खींच दी है. 1947 में जो जीवन प्रत्याशा दर लगभग 32 वर्ष हुआ करती थी, वह आज बढ़कर 68 वर्ष हो गई है. ऐसा अनुमान है कि 2050 तक दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति की उम्र 65 साल से अधिक होगी और करीब 50 करोड़ आबादी 80 साल से अधिक उम्र वालों की होगी. हार्ट केयर फाउंडेशन (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, "अधिक से अधिक लोग काम के लिए शहरों में जा रहे हैं, जिससे पारंपरिक परिवार संरचनाएं बाधित हो रही हैं. ऐसी स्थिति में, परिवार के बुजुर्ग ही हैं जो पीछे छोड़ दिये जाते हैं और ऐसी स्थिति में उनकी देखभाल कठिन हो रही है. वृद्ध व्यक्तियों को अक्सर युवाओं से कम सक्षम और कम काबिल माना जाता है."

                 उन्होंने कहा, "जागरूकता पैदा करने की जरूरत है कि बुजुर्गों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उन्हें स्वस्थ तरीके से जीने में मदद कर सकता है. वृद्धावस्था को जीवन के एक और चरण के रूप में देखने की आवश्यकता है. ऐसा करने और बुजुर्गों से सम्मान के साथ व्यवहार करने से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं."
                  मौजूदा आबादी के चलन को देखते हुए, यह उम्मीद की जाती है कि 2050 तक दुनिया में हर पांच में से एक व्यक्ति की उम्र 65 साल से अधिक होगी और करीब 50 करोड़ आबादी 80 साल से अधिक उम्र वालों की होगी.

Must Read:-
1. केले के छिलकों में है गुणों का ऐसा खजाना कि जानकर चौंक जाएंगे आप 
2. 5 बुरी आदतें जो आपको करती हैं बीमार,स्वस्थ दिल के लिए खाने की इन आदतों को बदलें... 




               डॉ. अग्रवाल ने कहा, "बुजुर्गों के सामने पेश आने वाली चुनौतियों पर ध्यान देने की जरूरत है और उन्हें सक्रिय भूमिका निभाने के लिए दुनिया को और समुदायों को अधिक समावेशी बनाने की आवश्यकता है. व्यक्तिगत स्तर पर, लोगों को स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए, बीमारियों और जटिलताओं से बचने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव करने चाहिए."
       
     डॉ. अग्रवाल ने उम्र बढ़ने के साथ स्वस्थ रहने के लिए सुझाव देते हुए कहा, "ऐसा मत सोचिए कि आप बूढ़े हो. अपनी 80 या 100 साल की आयु में से अनुभव के 20 से 40 या अधिक वर्ष कम करिए, जो बचे वही आपकी वास्तविक आयु है. धूम्रपान छोडें, व्यायाम को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. फिसलकर गिरने से बचने के लिए अपने घर में छोटे-मोटे बदलाव करें, विभिन्न आयु से संबंधित बीमारियों की जांच करने के लिए मेडिकल स्क्रीनिंग करवाएं."

                उन्होंने कहा, "हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि के साथ एक संतुलित स्वस्थ आहार लेने से उम्र बढ़ने पर अधिक समस्याएं नहीं होती हैं. कैल्शियम और विटामिन डी का सप्लीमेंट लेने से महिलाओं को खास मदद मिल सकती है. उम्र बढ़ने के साथ होने वाले डिमेंशिया और संज्ञानात्मक हानि का सामना करने के लिए बुढ़ापे में भी अपने दिमाग को सक्रिय रखना चाहिए. कई बुजुर्ग लोगों को नींद ठीक से लेने में समस्याएं आती हैं. अनिद्रा और दिन में ज्यादा सोने की शिकायतें आम हैं. ऐसे मुद्दों के बारे में अपने हेल्थकेयर प्रदाता से बात करें."
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Tuesday, 9 October 2018

रिसर्च में दावा- नोटों में मिले पेट की बीमारियां फैलाने वाले बैक्टीरिया

October 09, 2018 0

नोट पर मिले 78 तरह के बैक्टीरिया दे सकते हैं टीबी, अल्सर, और पेट की बीमारी : रिपोर्ट


रिसर्च में दावा- नोटों में मिले पेट की बीमारियां फैलाने वाले बैक्टीरिया

                  आपकी जेब में रखा नोट आपको बीमार बना सकता है। यह टीबी, अल्सर, पेट की बीमारी का करण बन सकता है। यह बात कितनी सही है? यह सवाल छोटे व्यापारियों के देशव्यापी संगठन 'कैट' ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से पूछा है। 'कैट' एक रिसर्च रिपोर्ट का हवाला देते हुए इस बात की जांच करने की मांग की है। कैट का कहना है कि ऐसे दावों की जांच कराकर सही तस्वीर सामने लाई जानी चाहिए। यदि दावे सही हैं तो बीमारियों से बचाव के उपाय किए जाने चाहिए।



रिपोर्ट में क्या है ?


                   रिपोर्ट्स के मुताबिक करेंसी नोट हजारों लोगों के हाथों से होकर गुजरते हैं। इनमें गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोग भी शामिल हैं। इस तरह करेंसी हजारों प्रकार के कीटाणुओं के संपर्क में आती है। इससे बीमारियां फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है। कैट ने इस पत्र की एक कॉपी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मंत्री जेपी नड्डा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को भी भेजी है। कैट का मानना है कि सरकार के अलावा मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को भी आगे आना चाहिए। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा, यदि रिसर्च रिपोर्ट्स सही हैं तो करेंसी नोट न सिर्फ व्यापारियों बल्कि आम उपभोक्ता के लिए भी खतरनाक हैं।'


नोटों पर 78 प्रकार के बैक्टीरिया मिले हैं :सीएसआईआर

                काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के अंतर्गत काम करने वाले संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटिग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के रिसर्च में चौकाने वाली बात सामने आई है। करेंसी नोटों में बीमारियां फैलाने वाले 78 प्रकार के बैक्टीरिया पाए गए हैं। ज्यादातर नोटों में पेट खराब होने, टीबी और अल्सर जैसी अन्य बीमारियां फैलाने वाले बैक्टीरिया मिले हैं। जापान और यूरोप के कई देशों में नोटों को मशीनों के जरिए बैक्टीरिया से मुक्त करने के लिए व्यवस्था की गई है।

Must Read:-
1. केले के छिलकों में है गुणों का ऐसा खजाना कि जानकर चौंक जाएंगे आप 
2. 5 बुरी आदतें जो आपको करती हैं बीमार,स्वस्थ दिल के लिए खाने की इन आदतों को बदलें... 




नोटों पर दिमागी बुखार के कीटाणु : आईजेसीएमएएस


                इंटरनेशनल जर्नल ऑफ करंट माइक्रोबायोलॉजी एंड एप्लाइड साइंसेज (आईजेसीएमएएस) ने तमिलनाडु के तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज में 2016 में करंसी नोटों पर रिसर्च की थी। जिन 120 नोटों पर रिसर्च की गई उनमें 86.4% नोट बैक्टीरिया से संक्रमित थे। ये नोट डॉक्टर्स, बैंक, बाजार, मीट कारोबारी, विद्यार्थी और गृहिणियों से लिए गए थे। डॉक्टरों से लिए गए नोटों में मूत्र संबंधी, सांस लेने में परेशानी, सेप्टिसीमिया, स्किन इन्फेक्शन, दिमागी बुखार आदि के कीटाणु पाए गए हैं।

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Sunday, 7 October 2018

केले के छिलकों में है गुणों का ऐसा खजाना कि जानकर चौंक जाएंगे आप

October 07, 2018 0
एक नजर केले के छिलके के बड़े फायदों पर :-

                हम सब ने सुना है कि फलों को उनके झिलकों के साथ खाना चाहिए, लेकिन हम में से कितने लोग इस बात को मानते हैं यह एक बड़ा सवाल है. यकीनन आप भी ऐसा ही करते होंगे. हममें से बहुत से लोग केला खाकर उसके छिलके (Banana Peels) को कुड़े में फेंक देते हैं. अगर आप ऐसा करते हैं तो जरा ठहर जाएं. क्योंकि जिस चीज को आप फेंक रहे हैं उसमें गुणों का ऐसा खजाना है जिसके बारे में जानकर आप चौंक सकते हैं.


                केले के छिलके (Health benefits of Banana Peels) की मदद से आप शरीर को भारी मात्रा में न्यूट्रीयंट्स देने के साथ वज़न भी कम कर सकते हैं. जी हां, केला एक ऐसा फल है, जिसे मानव द्वारा कई सालों से जोता जा रहा है. इसमें ज़रूरतमंद विटामिन जैसे बी-6 और बी-12 के अलावा मिनरल्स, पोटैशियम और मैग्नीशियम होता है. यह फाइबर का एक अच्छा स्रोत होता है, जो आपकी पाचन क्रिया को ठीक करने में काफी मदद करता है.
Benefits of Banana Peels: केले के छिलके में विटामिन-ए की मात्रा पाई जाती है.
Health benefits of Banana Peels:- 




5 बुरी आदतें जो आपको करती हैं बीमार,स्वस्थ दिल के लिए खाने की इन आदतों को बदलें... 


➤ केले के छिलके में विटामिन-ए  की मात्रा पाई जाती है, जो इम्यूनिटी को मज़बूत कर इंफेक्शन से लड़ने में मदद करता है.

➤ केले के छिलके में लुटीन  होता है, जो आंखों में मोतियाबिंद  होने से रोकता है.

➤ केले के छिलके में एंटी-ऑक्सीडेंटस  होने के साथ विटामिन-बी, ख़ासतौर से विटामिन-बी-6 की मात्रा होती है.

➤ इसमें घुलने वाले और न घुलने वाले फाइबर होते हैं, जो पाचन क्रिया के कार्य को धीरे कर, शरीर से कोलेस्टेरॉल को कम करते हैं.

➤ केले का छिलका खाने में से आप शरीर के लिए जरूरी पोटैशियम  और मैग्नीशियम  पा सकते हैं, जो बल्ड प्रेशर को बनाए रखने में मदद करती है.

➤ कई अध्ययनों का तो यह भी मानना है कि छिलके में सेरोटोनिन नाम का पदार्थ होता है, जो डिप्रेशन पर काबू रख आपको खुश रखता है. इसके अलावा इसमें डोपामाइन होता है, जो दिल की धड़कन पर नियंत्रण रख गुर्दो में खुन का प्रवाह बनाए रखता है.

➤ इस बात पर ध्यान देना भी जरूरी है कि केले का छिलका आपको कैसा लेना है. यह पका हुआ होना चाहिए या कच्चे केले का छिलका इस्तेमाल करना चाहिए.

➤ जापानी साइंटिफिक रिसर्च के मुताबिक पीले छिलके में एंटी-कैंसर गुण होते हैं, जो व्हाइट बल्ड सेल्स को उत्पन्न करने में मदद करते हैं. अगर आप अपने आहार में केले का हरा छिलका शामिल करते हैं, तो इसे मुलायम करने के लिए 10 मिनट उबालें. इसके बाद इस्तेमाल करें.

➤एक और अध्ययन के अनुसार बताया गया है कि हरे छिलके में ट्रिपटोफन  नामक पदार्थ होता है, जो एक तरह का अमीनो एसिड है. यह रात को अच्छी नींद लेने के लिए लाभकारी है.



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Friday, 5 October 2018

5 बुरी आदतें जो आपको करती हैं बीमार,स्वस्थ दिल के लिए खाने की इन आदतों को बदलें...

October 05, 2018 0
Top 5 Foods Habits for a Healthy Heart:-

                इस भागदौड़ भरी जिंदगी में Exercise और अच्छा खानपान दोनों ही जरूरी हैं. इससे आपका दिल तंदुरुस्त (Healthy Heart) रहता है. पिछले तीन दशकों में आम भारतीयों में दिल की बीमारी (heart disease) coronary artery disease (CAD) के मामलों में 300 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है. इससे पीड़ित 2 से 6 फीसदी लोग गांव-कस्बों में और 4 से 12 फीसदी लोग शहरों में रहते हैं. 

             कई चीजों के अलावा, इसके लिए जीवनशैली से जुड़े कारक जैसे कि शराब का अत्यधिक मात्रा में सेवन (Alcohol and Heart Health) भी जिम्मेदार है. अधिक मात्रा में शराब के सेवन से रक्त धमनियों में एक प्रकार की बाधा (cholesterol plaque in the walls of arteries) उत्पन्न हो सकती है, जिसे Atherosclerosis के नाम से जाना जाता है. इसके चलते एक अथवा कई रक्त धमनियां थोड़ी या फिर पूरी तरह से ब्लॉक  हो जाती हैं, जिससे रक्त के प्रवाह पर असर पड़ता है. अनियंत्रित CAD की वजह से एक समय के बाद हार्ट अटैक की आशंका भी बढ़ जाती हैं और आप किस तरह इस संभावना को कम कर सकते हैं-



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                दिल की बीमारियों (heart disease) से बचने के लिए आपको अपने आहार को अच्छा बनाने की जरूरत है. और सेहतमंद दिल के लिए कैसा आहार होना चाहिए ???

             इसके लिए न्यूट्रिशनिस्ट और बेलैंस को न्यूट्री एक्टीवेनिया की प्रमुख अवनि कौल ने दिल को स्वस्थ रखने के लिए ये पांच सुझाव दिए हैं (Top 5 foods for a healthy heart) :

1. भोजन की मात्रा पर ध्यान दें (Servings from Each Food Group):-

                 मोटापे से रक्तचाप बढ़ता है और फिर दिल की अनेक बीमारियां होने का सदैव अंदेशा रहता है. इसलिए हमेशा अपने शरीर की जरूरत भर ही खाना खाएं. मैदा इत्यादि का सेवन कम करें. सब्जियां और फलों की मात्रा बढ़ाएं. घर के बाहर खाने में अक्सर मात्रा का अंदाजा नहीं लग पाता है.

2. घर पर खाने को हमेशा प्राथमिकता दें (Homemade food):-

                अगर आप भी दिल की सेहत से जुड़े कुछ फैसले करना चाहते हैं तो बाहर की बजाए घर का खाना खाने की आदत ड़ालें. घर पर भोजन करना अधिक पौष्टिक होता हैं, क्योंकि आप स्वयं सब्जी, मसाले, चिकनाई एवं पकाने की विधि का चयन करते हैं. आप खाने को ज्यादा स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें विभिन्न प्रकार के मसाले डाल सकते हैं और नमक एवं चीनी जैसे हानिकारक तत्वों की मात्रा कम कर सकते हैं.

                  घर के खाने में परिवार के सभी सदस्यों से सलाह एवं सहायता लेकर एक पारिवारिक गतिविधि का रूप दे सकते हैं. यह खाना सस्ता भी पड़ता है. सब्जियों को अधिक तलकर या भून कर ना बनाएं. इन विधियों में तल की खपत अधिक हाती है जिससे मोटापा बढ़ता है. उबालकर या कम तेल में खाना बनाने की चेष्टा करें और जहां तक हो सके, हमेशा ताजा खाना खाएं.

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3. अधिक फाइबर वाला खाना खाएं (Fiber for Heart):-

                   साबूत दालें-अनाज, सब्जियां जैसे गाजर, टमाटर आदि में न घुलने वाला फाइबर होता है. दलिया, सेम, लोभिया सूखे मेवे और फल जैसे सेब, नींबू, नाशपाती, अनानास आदि में घुलनशील फाइबर होते हैं.

                   फाइबर युक्त भोजन अधिक समय तक पेट में रहता है, जिसके कारण पेट भरा हुआ महसूस होता है और खाना भी कम खाया जाता है. इसी कारण वजन भी कम होता है. फाइबर युक्त भोजन पाचन के समय शरीर से बसा निकाल देता है, जिसके कारण कॉलेस्ट्रॉल कम होता है व हृदय अधिक तंदुरुस्त होता है. फाइबर युक्त भोजन से अधिक ऊर्जा मिलती है जिसके कारण व्यायाम में थकान कम होती है. फाइबर युक्त भोजन से शरीर व हृदय दोनों सशक्त होते हैं.

4. अच्छी सेहत के लिए कम खाना चाहिए नमक और बासी खाना (Is Salt Bad for You?) :-

                  भोजन में अधिक नमक की मात्रा होने से रक्तचाप बढ़ जाता है. इस कारण हृदय में कई बीमारियां होने की संभावना भी बढ़ जाती है. तो जहां तक हो सके, ताजा खाना खाने की चेष्टा करें, क्योंकि पहले से निर्मित किये भोजन में कई हानिकारक पदार्थ होते हैं. ये भोजन का स्वाद ठीक बनाए रखने के लिए डाले जाते हैं. खाने को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए मसाले, हरा धनिया, पुदीना आदि डालिए. इस तरह नमक की मात्रा भी कम हो जाएगी.

5. नुकसानदेह चिकनाई यानी वसा की जगह फायदेमंद चिकनाई खाएं ( Which Fats Really Are Good for Your Heart?):-

                   यह जानना भी तार्किक है कि तेल, दूध एवं दूध से बनी वस्तुएं और लाल मांस में नुकसानदेह चिकनाई होती है जो आपका बुरा कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाकर आपके हृदय को अस्वस्थ करती है, लेकिन मछली, अंडा, झिल्ली उतारा हुआ मुर्गा, दालें, टोफू, किनुआ इत्यादि से पोष्टिक प्रोटीन एवं फायदेमंद चिकनाई दोनों मिलती है. बाजार में मिलने वाले अधिकतर खाने की वस्तुओं में अच्छा पौष्टिक तेल नहीं होता. इस कारण इनका उपभोग कम से कम करना चाहिए. चीनी एवं मैदे का उपयोग कम से कम करना चाहिए और भोजन में पौष्टिक तत्व जैसे सूखे मेवे, हरी सब्जियां इत्यादि का उपयोग बढ़ा देना चाहिए.

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Thursday, 4 October 2018

डेंगू के बारे में अहम बातें, जिन्हें शायद ही जानते होंगे आप

October 04, 2018 0

डेंगू एडीज़ मच्छर के काटने से फैलता है जिसमें तेज़ बुखार के साथ शरीर पर लाल रंग के चकते, सिर और बदन दर्द होता है।
                      हर साल सैकड़ों लोगों के लिए डेंगू जानलेवा बन जाता है। इस प्रकार यह आवश्यक है कि लोगों को इसके बारे में अवगत कराया जाए। डेंगू बुखार एडीज़ इजिप्टी मच्छर के काटने के माध्यम से फैलता है। ये मच्छर स्थिर पानी में उगते हैं, और आमतौर पर मानसून के दौरान जल-जमाव की स्थिति में उनका जन्म होता है। डेंगू में व्यक्ति को सबसे पहले तेज़ बुखार होता है जिसके बाद शरीर पर लाल रंग के चकते पड़ना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, भूख और उल्टी की कमी के लक्षण शामिल हैं। लेकिन रक्त परीक्षण के बाद ही डेंगू की पुष्टि की जा सकती है। डेंगू से संबंधित कुछ चीजें वे हैं जिन्हें आप शायद ही जानते हैं, चलिए कुछ 5 चीजें इस तरह जानते हैं -


डेंगू मच्छर आपके सफेद रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है-

               एक डेंगू मच्छर आपके लिए जानलेवा हो सकता है क्योंकि डेंगू मच्छर सीधे आपके सफेद रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है। इस प्रकार आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर पड़ने लगती है। एक डेंगू मच्छर एक समय में लगभग 100 अंडे देता है और यह लगभग दो सप्ताह तक रहता है।


रात में लाइट के उजाले में काट सकते हैं मच्छर-

               ऐसा माना जाता है कि डेंगू मच्छर केवल दिन की रोशनी में काटता है, लेकिन यहां बिंदु यह है कि रात में लाइट के उजाले में भी मच्छर के काटने की संभावनाएं बनी रहती हैं। डेंगू का मच्छर सुबह के वक़्त और शाम को सूर्यास्त के समय ज़्यादा काटता है। ये मच्छर 15-16 डिग्री से कम तापमान में पैदा नहीं हो पाते हैं। डेंगू के सबसे ज़्यादा मामले जुलाई से अक्टूबर के बीच दर्ज किए जाते हैं।


घरों में पानी की टंकी में पैदा होते हैं डेंगू मच्छर-

              दिल्ली स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 41% डेंगू मच्छर प्लास्टिक के ड्रम और टंकियों में पैदा होते हैं। इसके साथ ही कूलर में 12% और निर्माण स्थलों पर इस्तेमाल होने वाले लोहे के कंटेनरों में 17% डेंगू मच्छर पैदा होते हैं।

डेंगू में प्लेटलेट्स की कमी नहीं होती मौत की वजह-

               आम तौर पर लोग मानते हैं कि डेंगू के दौरान प्लेटलेट की कमी के कारण रोगी मर जाते हैं। लेकिन शायद ही लोग जानते हैं कि डेंगू में मृत्यु का कारण कैशिलरी लीकेज है। अगर एक मरीज को केशिका लीकेज होता है ऐसी स्थिति में, उसे तरल भोजन देना चाहिए। यह तब तक जारी रखना चाहिए जब तक उच्च और निम्न रक्तचाप के बीच का अंतर 40 से अधिक न हो।

डेंगू संक्रामक बीमारी नहीं है-

            डेंगू को आमतौर पर संक्रामक बीमारी माना जाता है। लेकिन हकीकत में, डेंगू संक्रामक बीमारी नहीं है क्योंकि यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता नहीं है। चार प्रकार के डेंगू बीमारी हैं। मरीज को एक बारी में एक ही प्रकार का डेंगू होता है और दूसरी बार डेंगू दूसरी तरह का होता है।डेंगू बीमारी को लेकर लोगों का मानना होता है कि इस दौरान प्लेटलेट्स काउंट बहुत मायने रखते हैं और सिर्फ़ इन्हें बढ़ाने पर ज़ोर देना चाहिए। आपको बता दें कि जिन मरीजों के प्लेटलेट काउंट 10,000 से कम पहुंच जाते हैं सिर्फ़ उन्हीं मरीज़ों के लिए डेंगू जानलेवा  स्थिति में पहुंचने की संभावना होती है।
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Wednesday, 3 October 2018

Ayurveda: easy steps to control Diabetes in Hindi

October 03, 2018 0

आयुर्वेद: मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए 3 आसान कदम, सीखें कि क्या करना है

                डायबिटीज जिसे सामान्यतः मधुमेह कहा जाता है। एक ऐसी बीमारी है जिसमें खून में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। उच्च रक्त शर्करा के लक्षणों में अक्सर पेशाब आना होता है, प्यास की बढ़ोतरी होती है, और भूख में वृद्धि होती है। अमेरिका में, यह मृत्यु का आठवां और अंधापन का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है। 

               आजकल पहले से कहीं ज्यादा संख्या में युवा लोग और यहां तक ​​कि बच्चे मधुमेह से पीड़ित हैं। बेशक, इसके लिए मुख्य कारणों में से एक पिछले 4-5 दशकों में चीनी, आटा और अजीब खाद्य उत्पादों में किए गए प्रयोग हैं। हम आपको मधुमेह के आयुर्वेदिक उपचार के बारे में बता रहे हैं।



ये 3 पेय फायदेमंद हैं -

➤ आंवले के स्वरस या आंवले के जूस को 40 मिली लेकर उसमें 1 ग्राम हल्दी पाउडर और 6 ग्राम शहद डालकर उसे सुबह-शाम इस्तेमाल करें। दूसरा उपाय है कि 20 ग्राम आंवला पाउडर लेकर उसमें 250 मिली पानी मिलाएं और उसको मध्यम आंच पर पकाएं और जब वो 1/4 मतलब लगभग 60 मिली रह जाए तो उसे उतार कर, छान कर, ठंडा करके उसमें 250 मिलीग्राम त्रिवंग भस्म, 500 मिलीग्राम छोटी इलायची का चूर्ण, 1 ग्राम हल्दी पाउडर, 6 ग्राम शहद को मिलाएं। इसे सुबह-शाम इस्तेमाल करें।

➤  दूसरा उपाय लगभग 150 ग्राम की अमरूद की पत्तियों को लेना है, उन्हें पीस कर पानी में भिगो लें और सुबह उन पत्तों को छान के उस पानी को घूंट ले लेकर पिएं। यह मधुमेह में राहत प्रदान करता है।

➤  यदि आपका शुगर लेवल बहुत अधिक है और आपको इसे सामान्य बनाना है, तो 50 ग्राम बांस की पत्तियां लें और इसे 600 मिलीलीटर पानी में उबालें जब तक कि यह लगभग 75 से 80 मिलीलीटर न हो। अब उसे ठंडा करके, छान कर पीएं। यह जल्द ही इससे शुगर का लेवल जल्दी ही सामान्य अवस्था में आ जाता है। आयुर्वेद में पंचकर्म विधा के द्वारा भी हम डायबिटीज़ का इलाज कर सकते हैं।

डायबिटीज़ के रोगी क्या करें, क्या न करें -

            अब बात करेंगे कि डायबिटीज़ के रोगियों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं। डायबिटीज़ के लिए दैनिक दिनचर्या बनाना बहुत महत्वपूर्ण है।

➤  सुबह जल्दी उठना चाहिए।

➤  व्यायाम के लिए समय निकलना चाहिए । हर रोज, प्राणायाम, योग, व्यायाम किया जाना चाहिए।

➤  आलसी जीवन शैली के बजाय, सक्रिय जीवनशैली अपनाना जाना चाहिए।

➤  साइक्लिंग, जिमिंग,स्विमिंग जो भी पसंद है उसे 30-40 मिनट तक ज़रूर करने की आदत डालें। 



क्या खाना खाएं -

जानें कि मधुमेह में किस प्रकार का आहार फायदेमंद है?

➤  मधुमेह को थोड़ा और पचाने वाला भोजन खाना चाहिए।

➤  मधुमेह में, हम सभी मौसमी और रसदार फल खा सकते हैं। यदि आप सूखे फल के बारे में बात करते हैं तो आप अखरोट, बादाम, चिया के बीज, मूंगफली और अंजीर भी ले सकते हैं।

➤  अपनी डाइट में गुनगुना पानी, छाछ, जौ का दलिया और मल्टीग्रेन आटा (मिलाजुला अनाज) शामिल करें।

इन चीजों को मत खाओ -

➤  मांसाहारी, शराब और सिगरेट का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

➤  डिब्बाबंद भोजन, पुराना भोजन, फास्ट फूड, जंक फूड, अधिक तेल मसालेदार खाना नहीं खाया जाना चाहिए।
         आप इन आयुर्वेदिक उपचारों का पालन करके स्वस्थ रह सकते हैं।
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